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फिर से दौड़ पड़ी जिंदगी: जानिए कैसे संभली नजमा जी की बिखरती जिंदगी?

फिर से दौड़ पड़ी जिंदगी: जानिए कैसे संभली नजमा जी की बिखरती जिंदगी?

“क्या आपने कभी सोचा है कि एक छोटी सी दर्द की शुरुआत आपकी पूरी जिंदगी को बदल सकती है?” यही कहानी है मुंबई के गौरेगांव ईस्ट, शिवशाही (प्रकल्प) मंत्री पार्क में रहने वाली नज़मा जी की, जिनकी जिंदगी एक समय पर पूरी तरह जोड़ों के दर्द की वजह से रुक सी गई थी। अक्सर लोग सोचते हैं कि यह सिर्फ बढ़ती उम्र की परेशानी है, लेकिन आज की बदलती लाइफस्टाइल में कम उम्र के लोग भी इस समस्या से काफी ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। अक्सर हमने आपने तो जरूर सुना होगा कि कोई बुजुर्ग व्यक्ति अगर नहीं चल पा रहा है तो उसे जोड़ों के दर्द की समस्या हो सकती है इस उम्र में आपको ये दर्द झेलना पड़ सकता है, पर आज कम उम्र के युवा भी जोड़ों से काफी परेशान हैं। आपको बता दें जोड़ों में दर्द के कई कारण हो सकते हैं जैसे- हड्डियों की कमजोरी, गलत तरीके से बैठना, खिचांव, चोट इत्यादि। जोड़ों के दर्द की समस्या को समय रहते ही सही करना चाहिए। वरना यह समस्या समय के साथ काफी ज्यादा बढ़ जाती है। “नज़मा जी कभी नहीं सोच सकती थीं कि एक दिन उठना-बैठना भी उनके लिए इतना मुश्किल हो जाएगा…” एक समय था जब नज़मा जी की जिंदगी मुस्कुराहटों से भरी थी… लेकिन फिर धीरे-धीरे जोड़ों के दर्द ने सब कुछ बदल दिया। आइये जानते हैं कि उन्होंने अपनी जिंदगी को बेहतर कैसे बनाया और कैसे उन्हें हकीम साहब की बूटी से अपने जोड़ों की दिक्कत से राहत मिल पाई?

जानें नज़मा जी की कहानी?

कभी जो जिंदगी मुस्कुराहटों से भरी थी, वहीं धीरे-धीरे जोडों के दर्द की वजह से परेशानी में आने लगी…” नज़मा जी मुंबई के गौरेगांव ईस्ट, शिवशाही (प्रकल्प) मंत्री पार्क के पास रहने वाली 34 साल की महिला हैं। उनका स्वभाव बेहद दयालु, शांत और सुलझा हुआ है। जो भी उनसे मिलता है, उनके व्यवहार और बातचीत के तरीके से तुरंत प्रभावित हो जाता है। उनका पारिवारिक जीवन भी बहुत ही खुशहाल था, जहां सभी लोग मिल-जुलकर रहते हैं और घर का माहौल हमेशा प्यार और अपनापन से भरा रहता है। लेकिन धीरे-धीरे समय ने ऐसा मोड़ लिया, जब उनके जोड़ों में दर्द की समस्या शुरू हुई। शुरुआत में हल्का दर्द था, लेकिन बाद में यह बढ़कर उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पर असर पड़ने लगा। परिवार भी उनकी इस स्थिति को देखकर काफी परेशान रहने लगा और सभी यही सोचने लगे कि आखिर उन्हें इस दर्द से राहत कैसे मिले और उनकी जिंदगी फिर से सामान्य कैसे हो?

जोड़ों के दर्द की वजह से घर का काम करने में होती थी काफी मुश्किलें

जोड़ों के दर्द ने धीरे-धीरे नज़मा जी की जिंदगी को इस कदर प्रभावित करना शुरू कर दिया कि रोजमर्रा के छोटे-छोटे काम भी उनके लिए एक बड़ी परेशानी बन गए। उंगलियों में होने वाला दर्द, शरीर की अकड़न और लगातार रहने वाली तकलीफ ने उनकी दिनचर्या को पूरी तरह बदल दिया था। पहले जहां वह घर के काम आसानी से संभाल लेती थीं, वहीं अब हर काम में उन्हें परेशानी होने लगी थी। इस दर्द की वजह से उनका मन भी किसी काम में नहीं लग पाता था और धीरे-धीरे उनका स्वभाव भी चिड़चिड़ा होने लगा, जिससे पूरे परिवार की जिंदगी पर असर पड़ने लगा। परिवार के सदस्य उन्हें इस हालत में देखकर काफी चिंतित रहते थे। जिस घर में कभी खुशहाली और मुस्कानें थीं, वहां अब उनकी तकलीफों की चिंता साफ दिखाई देने लगी थी। उन्होंने कई डॉक्टरों से सलाह ली और कई जगह दिखाया, लेकिन राहत सिर्फ कुछ समय के लिए ही मिलती थ, उसके बाद दर्द फिर से वापस आ जाता था। यह सिलसिला उन्हें कमजोर करने लगा था। धीरे-धीरे नज़मा जी को लगने लगा कि शायद अब यह दर्द उनकी जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। उन्होंने उम्मीद खोनी शुरू कर दी थी, लेकिन कहते हैं ना… बुरे समय में भी खुद पर भरोसा बनाए रखना सबसे जरूरी होता है, क्योंकि बदलाव कभी भी आ सकता है…..इसी के साथ उनकी जिंदगी दर्द के साथ गुजर रही थी।

नज़मा जी को किन मुश्किलों से गुजरना पड़ा?

  • रोजमर्रा के काम करना मुश्किल हो गया था।
  • इन्हें उंगलियों और शरीर में लगातार दर्द रहता था।
  • पारिवारिक जीवन पर असर पड़ने लगा था।
  • लगातार दर्द के कारण इनकी हिम्मत और उम्मीद कमजोर होने लगी।

दर्द से राहत तक का सफर – कैसे जुड़ीं हकीम साहब से नज़मा जी?

“जब दर्द से थकी हुई नजरों को टीवी पर मिली राहत की उम्मीद…” एक दिन रोज़ाना की तरह टीवी देखते हुए नज़मा जी की नजर यूनानी के मशहूर हकीम सुलेमान खान साहब के शो सेहत और जिंदगी पर पड़ी। शो में लोग अपनी समस्याएं पूछ रहे थे और हकीम साहब बड़े ही सरल तरीके से उनके सवालों का जवाब दे रहे थे। नज़मा जी ने देखा कि कई लोगों को यूनानी बूटी से फायदा भी मिला है। यही देखकर उनके मन में एक नई उम्मीद जगी और उन्होंने तय कर लिया कि वह भी एक बार इस यूनानी बूटी को जरूर आजमाएंगी। इसके बाद उन्होंने हकीम साहब से संपर्क किया और अपनी पूरी समस्या उनके साथ साझा की। सभी चीजों को समझते हुए हकीम सुलेमान खान साहब ने उन्हें जोड़ों के दर्द के लिए गोंद सियाह लेने की सलाह दी। बिना किसी देरी के नज़मा जी ने ATIYA HERBS से गोंद सियाह मंगवाया और बताए गए निर्देशों के अनुसार इसका सेवन शुरू किया। धीरे-धीरे उन्हें फर्क महसूस होने लगा। पहले जहां उठना-बैठना और घर के काम करना मुश्किल था, वहीं अब उनकी स्थिति पहले से काफी बेहतर हो गई। दर्द में कमी आने से उनका जीवन फिर से नॉर्मल होने लगा। आज नज़मा जी को स्वस्थ देखकर उनका पूरा परिवार बेहद खुश है, क्योंकि जो तकलीफें पहले उनकी जिंदगी को मुश्किल बना रही थीं, अब उनमें काफी सुधार देखने को मिल रहा है। पहले जहां वो उठ-बैठ नहीं पाते थे अब वो आसानी से अपने सारे काम कर लेते हैं।

कहानी से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदू-

  • अब सीढ़ियां चढ़ना और घर के काम करना आसान हुआ।
  • किसी सहारे की मोहताज नहीं हैं नज़मा जी।
  • परिवार में फिर लौटा खुशहाली का माहौल।

जोड़ों के दर्द से राहत के बाद फिर से लौट आई जिंदगी में मुस्कान

नज़मा जी हकीम जी की मेहरबानी से आज स्वस्थ और सेहतमंद जिंदगी बिता रहे हैं। जोड़ों के दर्द में मिली राहत ने उनकी जिंदगी को पहले से काफी आसान बना दिया है। अब वो स्वस्थ होने के बाद अपने दोस्त, और रिश्तेदारों को भी हकीम जी के घरेलू नुस्खे अपनाने की सलाह देती हैं। एक खास बातचीत में उन्होंने बताया कि हकीम जी की टीम के सभी लोग बहुत अच्छे हैं। बहुत ही इज्जत से बात करते हैं। यह उन्हें काफी अच्छा लगता है। नज़मा जी को यूनानी पर पूरा भरोसा हो गया है वो हमेशा यही दुआ करती हैं कि हकीम जी की उम्र लंबी हो और वो इसी तरह लोगों की मदद करते रहें। आज जो वो स्वस्थ और सेहतमंद जिंदगी बिता रही हैं उसका सारा श्रेय वो यूनानी के मशहूर हकीम सुलेमान खान साहब को देती हैं।

यहाँ देखिये उन्होंने हकीम साहब को धन्यवाद करते हुए क्या कहा

गोंद सियाह क्या है?

यह पौधा तिन्दुक कुल एबीनेसी का सदस्य है जो समस्त भारतवर्ष में पाया जाता है। इस पेड़ के तने को चीरा लगाने पर जो तरल पदार्थ निकलता है उसे गोंद सियाह कहते हैं, यह बहुत ही पौष्टिक होता है और सूखने पर काला और ठोस हो जाता है, इस गोंद में उस पेड़ के गुण पाये जाते हैं। गोंद सियाह हमारे शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है जो हमारे जोड़ों के दर्द के साथ शरीर की कई समस्याओं को हम से दूर रखता है। इसकी खुराक को हकीम साहब या उनकी संस्था के यूनानी विशेषज्ञों द्वारा बताई गयी मात्रा में ही लेना चाहिए। ज्यादा या कम मात्रा में इसका सेवन इसकी काम करने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है

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Gond Siyah (Indian Gum Arabic)
  • Clinic – The Herbals – Atiya Healthcare
  • Address – 21B/6, Basement Near Liberty Cinema, New Rohtak Road, Karol Bagh, New Delhi-5

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