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हकीम जी की बूटी से मिली दर्द में राहत, जानिए सच्ची कहानी?

हकीम जी की बूटी से मिली दर्द में राहत, जानिए सच्ची कहानी?

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और बदलती जीवनशैली की वजह से कमर दर्द की समस्या तेजी से लोगों को हो रही है। शुरुआत में मामूली लगने वाला यह दर्द धीरे-धीरे इतना बढ़ जाता है कि इंसान का उठना-बैठना, झुकना, चलना-फिरना और रोजमर्रा के काम करना तक मुश्किल हो जाता है। ऐसी ही एक कहानी है कानपुर के आवास विकास में रहने वाले 54 वर्षीय सतीश प्रसाद जी, जो पेशे से रेलवे में रिजर्वेशन सुपरिटेंडेंट हैं, वो एक समय अपनी जिंदगी को बड़े सलीके से जी रहे थे। लेकिन कहते हैं न मुसीबत कभी बताकर नहीं आती, कुछ ऐसा ही उनके साथ भी हुआ। उनका मिजाज काफी हंसमुख था लेकिन उनकी ये मुस्कान कब उनकी उदासी में बदल गई ये उन्हें ख़ुद ही नहीं पता चला, आपको बता दें की शुरुआत में उनकी कमर में हल्का दर्द हुआ, जिसे उन्होंने सामान्य समझकर नजरअंदाज कर दिया। लेकिन धीरे-धीरे यही दर्द उनके लिए नाक में दम करने लगा। गुजरते समय के साथ उनकी हालत ऐसी हो गई कि सीढ़ियां चढ़ना उनके लिए किसी पहाड़ चढ़ने जैसा महसूस होने लगा। बाइक चलाना तो दूर, झुकना भी उनके लिए मुश्किल हो गया था। समय के साथ उनकी परेशानी बढ़ती गई और उनका आत्मविश्वास धीरे-धीरे कम होने लगा। रोजमर्रा के काम, जो पहले आसान हुआ करते थे, अब उनके लिए ये सारे काम एक चुनौती बन गए। पर जब हर जगह से हिम्मत हार गए तब हकीम सुलेमान खान साहब की बूटी उनका सहारा बनी। आइये जानते हैं उनकी पूरी कहानी के बारे में?

आखिर कौन हैं सतीश प्रसाद जी?

कानपुर के आवास विकास में रहने वाले 54 वर्षीय सतीश प्रसाद जी, जो पेशे से रेलवे में रिजर्वेशन सुपरिटेंडेंट साहब काफी दयालु स्वभाव के व्यक्ति हैं लोगों की मदद करना उन्हें काफी अच्छा लगता है। पर वो कहते हैं न हर जगह उम्मीदें टूट जाए तो कोई न कोई रास्ता जरुर निकल ही जाता है। आपको बता दें कमर दर्द ने उनकी जिंदगी को इस कदर परेशान कर दिया था कि उनकी ज़िन्दगी में उनका ये दर्द हर दिन एक नई परेशानी लेकर आता था। घर-परिवार वाले भी उन्हें देखकर मायूस हो जाते थे। उनके लिए सीढ़ियां चढ़ना उठना-बैठना काफी मुश्किल हो गया था। आइये जानते हैं इसके अलावा उन्हें किन परेशानियों का सामना करना पड़ा?

उन्होंने किन समस्याओं का सामना किया?

  • सीढ़ियां चढ़ते समय कमर में तेज दर्द होता था।
  • झुकने पर असहनीय तकलीफ महसूस होती थी।
  • बाइक चलाना लगभग नामुमकिन हो गया था ।

उनकी हालत इतनी खराब हो गई की उन्होंने डॉक्टर से सलाह भी ली। कुछ समय तक दवाइयों से राहत मिली, लेकिन यह राहत हमेशा के लिए नहीं थी। जैसे ही दवा का असर कम होता, दर्द फिर से शुरू हो जाता, जिससे वो काफी दुखी हो जाते।, लेकिन इन सब में भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी उन्हें पूरा यकीन था की आज नहीं तो कल उन्हें उनके दर्द से राहत जरुर मिलेगी और हुआ भी ऐसा ही कुछ था। उन्हें उनके अंधेरे भरे जीवन में एक नयी रौशनी मिली और वो रोशनी थे हकीम साहब जिनके बारे में उन्होंने यूट्यूब पर सुना था। लेकिन कहते है अगर आपका बुरा समय है तो, अच्छा समय भी ज़रूर आएगा। ऐसा ही सतीश जी के साथ हुआ उनका अच्छा समय आ गया और उन्हें सही रास्ता मिल गया।

जब हर रास्ता बंद लगा… तब मिली नई उम्मीद

जब वो हार गए थे तब इसी बीच उनके कुछ दोस्तों ने उन्हें हकीम सुलेमान खान जी और उनकी यूनानी बूटी के बारे में भी बताया इसी के साथ उनके एक दोस्त ने हकीम जी का YouTube वीडियो देखने के लिए लिंक भी दिया। शुरुआत में उन्होंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया, लेकिन जब उन्होंने वीडियो देखा, तो उन्हें लगा कि शायद यही वो रास्ता है जिसकी उन्हें तलाश थी। क्योंकि हकीम सुलेमान खान साहब का बहुचर्चित शो सेहत और जिंदगी में लोग न सिर्फ़ अपने अनुभव बता रहे थे बल्कि लोग वहां अपनी दिक्कतें भी बता रहे थे, जिसे देख सतीश जी को हकीम जी की यूनानी बूटी पर विश्वास हुआ और उन्होंने बिना देरी किए स्क्रीन पर आ रहे नंबर पर कॉल किया और अपनी परेशानी बताई। जिसके बाद हकीम सुलेमान खान साहब की टीम ने उनकी समस्या सुनकर उन्हें गोंद सियाह लेने की सलाह दी, इसके बाद उन्होंने ATIYA HERBS की वेबसाइट से यूनानी जड़ी-बूटी “गोंद सियाह” मंगवाई और नियमित रूप से लेना शुरू किया। इसी के साथ उन्होंने हकीम जी के घरेलू नुस्खे भी अपनाए और धीरे-धीरे उन्हें फर्क महसूस होने लगा। जैसे कहते हैं—“बूंद-बूंद से घड़ा भरता है”, वैसे ही उनके दर्द में भी धीरे-धीरे कमी आने लगी।

जानियें कैसे मिला सतीश जी को आराम?

  • झुकने और चलने में पहले से काफी सुधार आया ।
  • रोजमर्रा के काम फिर से आसान होने लगे ।
  • आत्मविश्वास और ऊर्जा वापस लौट आई।

दर्द से परेशान जिंदगी में फिर लौटी खुशियां

आपको बता दें की कुछ ही समय में सतीश जी की हालत पहले से काफी बेहतर हो गई। अब वो पहले की तरह अपनी जिंदगी जीने लगे हैं। जिस व्यक्ति ने कमर के दर्द से राहत पाने की उम्मीद छोड़ दी थी अब वो आसानी से अपने घर के बाहर 4-5 चक्कर लगा लेते है। यहां तक सीढ़िया भी आसानी से चढ़ लेते है और उतर भी जाते है। सतीश जी का कहना है कि हकीम साहब आज के समय में जो काम कर रहे हैं उसके लिए बहुत बड़ा दिल चाहिए। हकीम साहब बिना किसी स्वार्थ के लोगों की मदद कर रहे हैं। उन्हें बड़ी से बड़ी समस्याओं से बचा रहे हैं। हकीम साहब के लिए सतीश जी यही दुआ करते हैं कि वह ऐसे ही स्वस्थ रहें और इसी प्रकार से लोगों की मदद करते रहे। आज सतीश जी हकीम जी की यूनानी बूटी को अपनाकर बेहद खुशी के साथ जीवन व्यतीत कर रहे हैं। साथ ही, वे हकीम जी की बूटी को अपनाने की सलाह अपने दोस्तों को भी देते है। आज सतीश जी अपनी सभी परेशानियों के कम होने का सारा श्रेय यूनानी की मशहूर हकीम साहब को देते है। साथ ही उनका तेह दिल से शुक्रिया करते हैं।

यहाँ देखिये उन्होंने हकीम साहब को धन्यवाद करते हुए क्या कहा

गोंद सियाह क्या है?

यह पौधा तिन्दुक कुल एबीनेसी का सदस्य है जो समस्त भारतवर्ष में पाया जाता है। इस पेड़ के तने को चीरा लगाने पर जो तरल पदार्थ निकलता है उसे गोंद सियाह कहते हैं, यह बहुत ही पौष्टिक होता है और सूखने पर काला और ठोस हो जाता है, इस गोंद में उस पेड़ के गुण पाये जाते हैं। गोंद सियाह हमारे शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है जो हमारे जोड़ों के दर्द के साथ शरीर की कई समस्याओं को हम से दूर रखता है। इसकी खुराक को हकीम साहब या उनकी संस्था के यूनानी विशेषज्ञों द्वारा बताई गयी मात्रा में ही लेना चाहिए। ज्यादा या कम मात्रा में इसका सेवन इसकी काम करने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है

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Gond Siyah (Indian Gum Arabic)
  • Clinic – The Herbals – Atiya Healthcare
  • Address – 21B/6, Basement Near Liberty Cinema, New Rohtak Road, Karol Bagh, New Delhi-5

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